Friday, April 24, 2020

Accounting Voucher

कोन्टरा वाउचर ( Contra Voucher ( F4 ) ) - कोन्टरा वाउचर का प्रयोग फंड ट्रांसफर करने के लिए किया जाता हैं । कोन्टरा वाउचर में कैश व बैंक के मध्य हुई लेन - देनों को रिकॉर्ड किया जाता हैं । इसलिये इसमें केवल कैश व बैंक से सम्बंधित लेजर्स ही प्रदर्शित होते हैं ।

1 . Amount Deposited into Bank
BankA/cDr.
ToCash A/c
2 . Cash Withdrawal from Bank
CashA/cDr.
To Bank A/c

पेमेन्ट वाउचर ( Payment Voucher ( F5 ) ) - सभी प्रकार के भुगतान चाहे वह कैश या बैंक के माध्यम से हों , पेमेन्ट वाउचर में ही रिकोर्ड किये जाते हैं । सामान्य रुप से पेमेन्ट वाउचर का प्रयोग तब किया जाता हैं , जब कोई खर्चा होता हैं , माल या सामान खरीदते हैं , लेनदारों को चुकाते हैं ।

1 . Amount Paid to Suppliers
SuppliersA/cDr.
ToCash / Bank A/c
2 . Expenses paid
ExpensesA/cDr.
To Cash / Bank A/c

रिसीप्ट वाउचर ( Receipt Voucher ( F6 ) ) - सभी प्रकार के नकद प्राप्ति चाहे वह कैश या बैंक के माध्यम से हों , रिसीप्ट वाउचर में ही रिकोर्ड किये जाते हैं । सामान्य रुप से रिसीप्ट वाउचर का प्रयोग तब किया जाता हैं , जब आय होती हैं , माल या सामान नकद में बेचते हैं , देनदारों से प्राप्ति होती हैं ।

1 . Amount Received from Customers
Cash / BankA/cDr.
To Customers A/c

जर्नल वाउचर ( Journal Voucher ( F7 ) ) - जर्नल वाउचर एक एडजेस्टमेंट वाउचर हैं , दो या दो से । अधिक खातों के बीच की एडजेस्टमेंट को रिकोर्ड करने के लिए जर्नल वाउचर का प्रयोग किया जाता हैं ।

Sales Return / Purchase Return
Credit Assets Purchase / Sales
Drawings / Donation / Charity as Goods
Goods Distribution as Free Sample
Loss by fire / Loss by theft
Any Adjustment Entry

सेल्स वाउचर ( Sales Voucher ( F8 ) ) - सभी प्रकार की सेल्स लेन - देन चाहे वह नकद या उधार हों , उन्हें सेल्स वाउचर में रिकोर्ड किया जाता हैं । यहाँ सेल्स या सेल्स वाउचर का सम्बंध केवल माल के बेचने से हैं ।

Customers / Cash BankA/cDr.
To Sales A/c

परचेज वाउचर ( Purchase Voucher ( F9 ) ) - सभी प्रकार की क्रय लेन - देन चाहे वह नकद या उधार हों , उन्हें परचेज वाउचर में रिकोर्ड किया जाता हैं । यहाँ परचेज या परचेज वाउचर का सम्बंध केवल माल से हैं ।

PurchaseA/cDr.
To Customers / Cash / Bank Ac

क्रेडिट नोट वाउचर ( Credit Note Voucher ) - क्रेडिट नोट वाउचर सामान्यतः वाउचर एन्ट्री स्क्रीन के दौरान दिखाई नहीं देता हैं । इसे सक्रिय करने के लिए F11 कुंजी दबाकर Use Debit / Credit Notes ऑप्शन को यस करना होता हैं । क्रेडिट नोट वाउचर का प्रयोग ग्राहक के एकांउट को क्रेडिट करने के लिए करते हैं । दूसरे शब्दों में क्रेडिट नोट वाउचर का प्रयोग सेल्स रिटर्न ( जब बेचा हुआ माल वापस आता हैं ) को रिकोर्ड करने के लिए करते हैं । इसके अलावा माल की कीमत में पाए गए अंतर , छूट आदि को सैट करने के लिए भी किया जाता हैं । इस वाउचर का प्रयोग करने के लिए Crtl + F8 कुंजी का प्रयोग करें । इस वाउचर में एन्ट्री निम्न प्रकार होगी -

ParticularsDebitCredit
To : Customer ' s Ledger / Cash / BankAmount
By : Sales Return / DiscountAmount

डेबिट नोट वाउचर ( Debit Note Voucher ) - डेबिट नोट वाउचर का प्रयोग सप्लायर के एकांउट को डेबिट करने के लिए करते हैं । दूसरे शब्दों में डेबिट नोट वाउचर का प्रयोग परचेज रिटर्न ( जब खरीदा हुआ माल वापस भेजा जाता हैं ) को रिकोर्ड करने के लिए करते हैं । इसके अलावा माल की कीमत में पाए गए अंतर कमी , छूट आदि को सैट करने के लिए भी किया जाता हैं । इस वाउचर का प्रयोग करने के लिए Ctrl + F9 कुंजी का प्रयोग करें । इस वाउचर में एन्ट्री निम्न प्रकार होगी ।

ParticularsDebitCredit
To : Customer ' s Ledger / Cash / BankAmount
By : Sales Return / DiscountAmount

Thursday, April 16, 2020

Voucher Entry

Vouchar Entry :-
1) In Double Entry Mode :- इस टाइप में डेबिट और क्रेडिट का विवरण अलग कालम में होता है | नीचे double Entry Mode वाउचर एंट्री स्क्रीन का उदाहरण है:

ऊपर की स्क्रीन में निम्नलिखित कपोनंट है -
a) Date :-वाउचर एंट्री स्क्रीन के ऊपर बाएँ ओर, एक डेट का आप्शन होता है | वाउचर एंट्री करते समय पिछले वाउचर की डेट यहाँ डिफ़ॉल्ट रूप से आ जाती है | इसमें बदली करने के लिए F2 कि प्रेस करे|
b) Type of Voucher :- स्क्रीन के उपर सिलेक्ट किया वाउचर का टाइप दिखता है |
c) Ref. :- यह आप्शन सिफ पर्चेस और सेल्स टाइप में दिखता है | यहाँ आप बिल नंबर को रिफरेन्स नंबर के रूप में दे सकते है |
d) Dr/Cr :- यहाँ डिबट लेजर डिबट साइड में और क्रेडिट लेजर क्रेडिट साइड में सिलेक्ट करे| अगर आपको यहाँ Dr/Cr की जगह To/By दिख रहा है तो F12 कि प्रेस करे और Use Cr/Dr instead of To/By during entry के सामन Yes दे और फिर सेव करने के लिए Ctrl + A प्रेस करे|
e) Debit/Credit Amount :- यहाँ अमाउंट दे।
f) Narration :- यहाँ इस वाउचर एंट्री के बार में वि᭭तार से विवरण होता है।

2) In Single Entry Mode :- यह सिर्फ Payment, Receipt और Contra voucher टाइप के लिए है | यहाँ हम वाउचर एंट्री के समय डेबिट या क्रेडिट को स्पेसिफाई करने की जरूरत नही है | यह एक से अधिक डेबिट या क्रेडिट सिलेक्ट करने में मदद करता है |

Note: Single Entry Mode को एक्टिव करने के लिए Configure button को क्लिक करे, फिर F12 कि प्रेस करे| बाद में Use Single Entry mode for Pymt./Rcpt./Contra के सामने Yes सिलेक्ट करे| आखिर में Ctrl+A कि प्रेस करके सेव करे|

3) Show Ledger Current Balances :- उपर दिए गए वाउचर एंट्री के दौरान अगर आपको लेजर बैलेंस देखना है, तो F12 कि प्रेस करे| Show Ledger Current Balance के आगे Yes दे और फिर बाद में Ctrl+A कि प्रेस करके सेव करे|

4) Warn of Negative Cash Balance :- अगर आप चाहते है की, टैली ने आपको नेगिटिव कैश की वार्निंग देना चाहिए, तो Configure बटन पर क्लिक करे| F12 कि प्रेस करे और Warn on Negative cash balance के सामने Yes दे| आखिर में Ctrl+A कि प्रेस करके सेव करे|

Accounting Voucher

Objective :-
1. वाउचर एंट्री के टाइप देखना
2. वाउचर एंट्री करना

Voucher: एक वाउचर एक दस्तावेज होता है, जो किसी वित्तीय ट्रांजेक्शन का विवरण होता है | मैन्युअल एंट्री में इस जर्नल एंट्री भी कहते है | वाउचर में सभी बिजनेस ट्रांजेक्शन पूर्ण विवरण के साथ रिकॉर्ड किया जाता है |

Types of Voucher: Tally.ERP 9 में पूर्व निधारित निम्नलिखित वाउचरके प्रकार है |

1) Contra (F4) : यह प्रकार केवल बैंक अकाउंट और कैश ट्रांजेक्शन के लिए उपयोग होता है | उदाहरण के लिए आपने बैंक में कैश जमा किया या बैंक से कैश निकाला या फिर एक बैंक अकाउंट से दूसरे अकाउंट में पैसा ट्रान्सफर किया तो इन्हे Contra में लेना चाहिए| लेकिन बैंक से लोन लिया तो यह इस वाउचर टाइप में नही आएगा|
Eg. 1) Open Bank Account in Bank of India with Rs. 5000
2) Withdrawn from Bank of India Rs. 2000

2) Payment (F5) : यह प्रकार तब सिलेक्ट करे जब ट्रांजेक्शन कैश में हो| उदाहरण के लिये जब cash a/c या किसी बैंक अकाउंट से कैश से भगतान किया हो तो इस टाइप को सिलेक्ट करे|
E.g. 1) Machinary Purchase for cash Rs. 20000
2) Salary Paid Rs. 3000

3) Receipt (F6) : जब बिजनेस में कोई भी स्त्रोत से कैश या चैक आता है तो इस वाउचर का टाइप सिलेक्ट करे|
E. g. 1) Machinary Sold for cash Rs. 10000
2) Commission Received Rs. 2000

4) Journal (F7) : जब गैर कैश ट्रांजेक्शन हो या जो उपर दिए गए किसी टाइप में फिट नही हो रहा है तो इस टाइप को सिलेक्ट करे| उदाहरण के लिए क्रेडिट पर सेल्स और पर्चेस, लिए लोन पर ब्याज देना या कुछ अकाउंट एडजेस्टमेंट|
E.g. 1) Depreciation to be charged on Machinery Rs. 50000
2) Bills Receivable of Rs. 10000 from Sun Traders.
3) Bills Payable to India co. of Rs. 2500

5) Sales (F8) : सभी कैश और क्रेडिट सेल्स के लिए यह टाइप सिलेक्ट करे|
E.g. 1) Sold Goods on credit to Sun Micorsystem for Rs. 20000

6) Credit Note (Ctrl + F8) : जब हमें सेल किया हुआ माल वापस मिलता है, तो उसका डीटेल एक नोट में होता है जिसे क्रेडिट नोट कहा जाता है | जब सेल्स रिटर्न ट्रांजेक्शन हो तब यह वाउचर टाइप सिलेक्ट करे|
E.g. 1) Goods Return by Sagar Traders of Rs. 2500

नोट – डेबिट/क्रेडिट नोट को एि᭍टव करने के लिए वाउचर एंट्री स्क्रीन पर F11 कि प्रेस करे| फिर Use Debit/Credit Notes के आग Yes दे| इसके अलावा Reverse Journal और Memo को एक्टिव करने के लिए Use Rev. Journal & Optional vouchers के आगे Yes दे| आखिर में सेव करने के लिए Ctrl + A प्रेस करे|
) Purchase (F9) :- सभी पर्चेस (कैश और क्रेडिट मे) को Purchase Voucher टाइप में एंटर करे|
E.g. Puchase Machinery from Sun Traders for Rs. 40,000/-.

8) Debit Note (Ctrl + F9) :- जब हम खरीदा हुआ माल वापस करते है, तो उस माल का विवरण एक नोट में होता है | इस डेबिट नोट कहा जाता है। जब पर्चेस रिटर्न ट्रांजेक्शन हो तब यह वाउचर टाइप सिलेक्ट करे|
e.g. 1) Goods return to Sumit Traders of Rs. 3000

9) Reversing Journal (F10) :- इस एंट्री का प्रभाव सिधे अकाउंट पर नही होता| कई बार कुछ ट्रांजेक्शन के असर को प्रयोगात्मक के लिए देखना होता है, तब इस वाउचर टाइप को सिलेक्ट करे|
इस टाइप में कि जाने वाली एंट्रीज का असर वशेष पिरीएड के लिए हि हेाता है और हम उस पिरीएड पर ही इसका प्रभाव देख सकते है | इस पिरीएड के बाद इस वाउचर टाइप के सभी एंट्रीज रिवर्स हो जाती है |
नोट: इस वाउचर टाइप एक्टिव करने के लिए वाउचर एंट्री स्क्रीन पर F11 प्रेस करे और Use Reversing Journals & Optional Vouchers option में Yes दे|

10) Memo (F10) :- मेमो वाउचर एक नॉन एकाउंटिंग वाउचर है और इसमें किए गए सभी एंट्रीज अकाउंट पर असर नही करते| यह एंट्रीज एक अलग मेमोरी रजिस्टर में स्टोर होती है | आप इन मेमोरी वाउचर को रेगुलर वाउचर में कन्वर्ट करे सकते है | जब आप भविष्य में होन वाले खर्च के लिए प्रावधान करना चाहते है, लेकिन भूलने की सभावना होती है, तो यह वाउचर टाइप सिलेक्ट करे|
उदाहरण के लिए जब आपने किसी एम्प्लाई को कुछ आइटम खरीदन के लिए कैश देत है, जिसकी सही किमत आपको मालूम नही है | तो बजाय दो एंट्रीज करने के, जिसमें से एक petty cash advance और दुसरी बची नकदी की वापसी , आप इस एंट्री को मेमोरी में करे और बाद में इस वास्तव में खर्च अमाउंट कि ही एंट्री पेमेंट वाउचर में करे|

11) Post Dated :- इस टाइप का भविष्य की एंट्रीज के लिए ही उपयोग हाता है | लेकिन मेमोरी वाउचर के विपरीत, यह एंट्रीज अपन आप दी गई तारीख पर रेगुलर एंट्रीज में कन्वर्ट हो जाती है | रेगुलर होने वाले ट्रांजेक्शन के लिए यह वाउचर टाइप उपयोगी है | उदा. अगर आप हर महीन की 10 तारीख पर किराया भुगतान करते है, तो आप post dated voucher टाइप में यह सभी एंट्रीज को करे और फिर हर मिहन की 10 तारीख को यह एंट्रीज ऑटोमेᳯटक रगलर एंट्री में कन्वर्ट होगी | Ctrl+T प्रेस करके आप Post Dated Voucher टाइप को सिलेक्ट करे सकते है |

12)Optional :- ऑप्शनल वाउचर किसी भी वाउचर का प्रकार नही है | सभी वाउचर (non-accounting vouchers को छोड क) को वाउचर एंट्री करते समय ऑप्शनल माक करे सकते है | ऑप्शनल वाउचर एक नॉन एकाउंटिंग वाउचर है, यानी इसमें किए गए सभी वाउचर एंट्रीज का असर अकाउंट बैंक पर नही होगा| टैली इआरपी9 इन एंट्रीज को लेजर में पोस्ट नही करता लेकिन इसको अलग ऑप्शनल रजिस्टर में स्टोर करके रखता है | आप इनमें बदल करे सकते है और जब चाह तब इन ऑप्शनल वाउचर को रगुलर वाउचर में कन्वर्ट करे सकते है |
उदाहरण के लिए आप 50,000 / - की मशीनरी के लिए अगले महीने में खर्च करना चाहते है, लेकिन इस वाउचर के साथ आज ही रिपोर्ट दखना चाहते है | तो आप यह एंट्री करते समय आप इस ऑप्शन मार्क कर सकते है | फिर जब आप इस ऑप्शनल वाउचर के साथ रिपोर्ट देखोगे तो इसका इफेक्ट आप देख सकते है |

Creating a New Voucher Type हम उपरोक्त वाउचर टाइप के अलावा अन्य नया वाउचर टाइप बना सकते है | मान लीजिए हम बैंक और पीटी कैश को अलग रिकॉर्ड करना चाहते है और इसके लिए पहले से डीफाइन पेमेंट वाउचर की जगह दो वाउचर टाइप चाहते है | यह करने के लिए हम Bank Payment voucher टाइप बनाना होगा| एक नया वाउचर टाइप बनान के लिए -
Go to the Gateway of Tally - Accounts Info. - Voucher Types - Create.
अब हम निम्न जानकारी को भरना है –

1. Name: Bank Payment
2. Type of Voucher: Payment (डिफ़ॉल्ट Tally.ERP 9 वाउचर को स्पेसिफई कर, जिसका कार्य नए वाउचर को कापी चाहिए)
3. Abbr.: Bank Pymt (संक्षिप्त रूप)
4. Method of Voucher Numbering: यहाँ आप Automatic, Manual or None में से किसी एक चुन सकते है |
5. Use Advance Configuration: No
6. Use EFFECTIVE Dates for Vouchers: No
7. Make ‘Optional’ as default: No (Yes दिया तो यह इस वाउचर टाइप को डिफ़ॉल्ट रूप से ऑप्शनल वाउचर बना देगा)
8. Use Common Narration: Yes
9. Narrations for each entry: No
10. Print after saving Voucher: No
11. Name of Class: Skip.
आखिर में सेव करने के लिए Y या Enter प्रेस करे|

Wednesday, April 15, 2020

1. Creates Ledger and Groups 2. Create Accounts/Ledger3. Create Multiple Ladgers4. Create New Group5. Exercise6. Voucher7. Types of Voucher

Objective :-
1. लेजर बनाएँ।
2. एक से अधिक लेजर बनाए।
3. लेजर का ग्रूप बनाएँ।

Ledgers/ Accounts:जनल एंट्रीज करने से पहले हम लेजर बनान होता है | लेजर एक तरह के अकाउंट होता है, जिनकी मदद से हम वाउचर एंट्रीज करते है | उदाहरण के लिए Sahayog Traders a/c, Bank A/c आदि.
Goups:ग्रूप एक हि तरह के लेजर्स का संग्रह होता है | हम एक ही तरक लेजर्स का कंपनी पर प्रभाव देखन के लिए इन ग्रूप को बनात है | उदाहरण के लिए सभी सेल्स लेजर को Sales account ग्रूप में लेत है |
Predefined Groups of Accounts : Tally.ERP 9 में पहले से ही 28 पूर्व निधारित ग्रूप होता है| जिसम से 15 मुख्य या प्राथमिक ग्रूप और 13 सब-ग्रूप होता है |
Create Accounts/Ledger : लेजर बनाने के लिए - Getway of Tally---------Accounts ------- Create Info. ---Leadger --SingleLedger----
लेजर कि इस विंडो में निचे के हेडस है -
Name:यहाँ पार्टी का / लेजर का नाम दर्ज करे।
Alia: अगर आप उपनाम / नाम देना चाहते है तो यहाँ दे|
Under: यह लेजर जिस ग्रूप के नीचे आता आता है उसको सिलेक्ट करे|
Inventory Values are Affected:अगर आप invantri मेन्टेन करे रह है और इस लेजर के ट्रांजेक्शन invanri पर असर करग तो यहाँ Yes दे|
Address: का पता दर्ज करे|
State:लिस्ट स्टेट्स को सिलेक्ट करे|
Pin Code: पिन कोड दर्ज करे|

Opening balance: अगर कोइ ओपनिंग बैलेंस है तो यहाँ दर्ज करे| यहाँ अकाउंट ग्रुप और उनके संभव लेजर की लिस्ट है –

.S.N.

Particulars

Details

1

Bank Accounts

(Do not take banks from which we take loan)

For Saving & Current Accounts

2

Bank OCC(Overdreft

and Cash Credit)

& Bank OD A/c

Accounts of Bank Overdreft in any

3

Branch/Division

Accounts of any branch or division of

business

4

Capital Account

Accounts for Capital

5

Cash-in-Hand

For Cash A/c, Petty Cash

6

Current Assets

For Assets A/c which are of Short Period

or regurlarly fluctuating value like Bills

Receivable,

7

Current Liabilities

liabilities which are of short period likes

Bills Payable.

8

Deposite Assets

For Fixed Deposite in Bank or any Bonds

9

Direct Expenses &

Expenses ( Direct )

Expenses which effets directly on

Production or Gross Profit like Factory

Rent, Wages etc.

10

Direct Incomes &

Income (Direct )

Incomes which affets directly on

Production or on Gross Profit

11

Duties & Taxes

For A/c like VAT, Excise duty, Sales Tax,

Income Tax come under this group.

12

Expenses Indirect &

Indirect (Expenses )

Expenses under administration come

under this group like Advetisement, Salaries etc.

13

Income Indirect &

Indirect (Income )

Incomes like Commission received, Rent

received

14

Fixed Assets

For the assets which are of long period

come under this group like Machinary, Building etc.

15

Investment

For investment in Shares, Bonds, Long

term Bank Deposite etc.

16

Loans (Liability )

For the long term loan taken form others

17

Misc. Expenses

(Assets)

For the Assets which are before start

company

18

Provision

For the Provision of Future expenses like

Income Tax, Depreciation

19

Purchase A/c

For the accounts of Purchase &

Purchase ruturn

20

Sales A/c

For the accounts of Sales & Sales Return

21

Reserves & Surplus /

Retained Earning

For the accounts of Reserves like

General Reserve

22

Stock - in - hand

For Closing Stock

23

Sundry Creditor

From whom purchased goods on Credit

24

Sundry Debtor

To whom sold goods on Credit.

25

Suspense A/c

For the Accounts whous group we can't

decied

26

Secured Loans

For long term and short term loan whic is

taken against security of some assets

27

Unsecured Loans

For loans obtained without any security


.लेजर स्क्रीन में निम्नलिखित आप्शन उपलब्ध है -

Display – यहाँ बनाए लेजर की लिस्ट दिखती है |
Alter – यहाँ से आप लेजर में बदल करे सकते है |
Delete ledger – आप Alter स्क्रीन पर Alt+D कि प्रेस करके कोई भी लेजर डीलीट कर सकते है |
Create Multiple Ladgers:अगर आप जल्दी से एक ही ग्रूप में कई लेजर बनाना चाहते है तो यह आप्शन 

Under group: जो ग्रूप के निचे यह लेज़र बनाना है वह ग्रूप सिलेक्ट करे|
Create New Group:
Group: एक ही नचेर के लेजर्स का कलशन को ग्रुप कहा जाता है | टैली में पहले से ही कइ ग्रूप बने होते है, लेकिन अगर आपको खुद का कोई ग्रूप बनाना है तो -
Getway of Tally ----Account Info.----- Groups------Single Group----- Create


यहाँ निचे की जानकारी को भरे –
1) Name: ग्रूप का नाम यहाँ एंटर करे|
2) Alias: रेफरेन्से के लिए अगर आप अलग नाम चाहते है तो यहाँ दे|
3) Under: टैली में पहले से ही डीफाइन ग्रूप में से काई भी पैरेंट ग्रूप को सिलेक्ट करे|
4) Group behaves like a Sub-Ledger: अगर आपने यहाँ Yes सिलेक्ट किया तो यह यह ग्रूप लेजर के लिए कंट्रोल अकाउंट कि तरह काम करगा| यानी सिफ ग्रूप का बैलेंस दिखेगा नाकि लेजर के हिसाब से|
5) Nett Debit/Credit Balances for Reporting: अगर आपने यहाँ Yes सिलेक्ट किया तो Trial Balance में अलग डिबट और क्रेडिट बैलेंस कि जगह इस ग्रूप की नट अमाउंट दिखेगी|
6) Used for calculation: अगर आप इस ग्रूप के एकाउंटिंग करते समय ड्यूटी और टास्क को लागू करना चाहते है तो यहाँ Yes सेक्लेक्ट करे|


Alter Group: ग्रूप तयार करने के बाद अगर आपको इसमें बदलाव करना है तो Single and Multiple Groups से After को सिलेक्ट करे|


Delete Group:किसी ग्रूप को डीलीट करने के लिए Alt + D प्रेस करे| लेकिन ग्रूप को डीलीट करने से पहले इसके सभी लेजर्स को डीलीट करना होगा|


Exercise:1 अब निचे दिए गय लेजर बनाए| इसकी वाउचर एंट्री आप चैप्टर न. 5 के एक्सरसाइज 2 में देखेंगे|

Sr. No.

Ledger

Group

1

Capital A/c

Capital Account

2

Vehical A/c

Fixed Assets

3

Furniture A/c

Fixed Assets

4

Bank of India

Bank Account

5

Purchase A/c

Purchase A/c

6

Sales A/c

Sales A/c

7

Sujit A/c

Sundry Debtors

8

Telephone Bill A/c

Indirect Expenses

9

Commission Rec. A/c

Indirect Income

10

Himanshu Sales

Sundry Creditors

11

Purchase Return A/c

Purchase A/c

12

Salary A/c

Indirect Income

13

Janta Bank A/c

Loans (Liability)

14

Advertisement Exe. A/c

Indirect Expenses

15

Office Rent A/c

Indirect Expenses

16

Dhiraj A/c

Sundry Debtor

17

Sales Return A/c

Sales Account

18

Electricity Bill A/c

Indirect Expenses

19

Vehical Depreciation A/c

Depriciation

20

Furniture Depreciation

A/c

Depriciation

21

Bills Receivable A/c

Current Assets

22

Kishor A/c

Sundry Creditor

23

Bills Payable A/c

Current Liability

24

Mandar A/c

Sundry Debtor

25

Sum Microsystem A/c

Sundry Debtor


Company कैसे बनाऐ

Maintaining Company Data
2. Modification of Company information

Objective :-
1.टैली में कंपनी बनाए
2.कंपनी को एडिट करना
3. कंपनी की जानकारी को एडिट करना

हम एक उदाहरण के लिए एक कंपनी अपेक्स सेल्स और सर्विस को लेत है | यह कंपनी कंप्यूटर के उपकरणों और सॉफ्टवेर खरीद करती है और यह सीधे ग्राहकों को बचती है | अब नीचे दी गई जानकारी के अनसार यह कम्पनी बनती है - Gateway of Tally > Company Info. > Create Company अब company creation की Windows ओपन होगी, यहाँ निम्न जानकारी टाइप करे –


➲ Directory: कंपनी डाटा जो लोकैशन पर स्टोर होगा, उसका पाथ को हम यहाँ दे सकते है |
➲ Name: कंपनी का नाम यहाँ दे|
➲ Company Logo: हम यहाँ कंपनी के लोगो को डीफाइन करे सकते है |
➲ Mailing Name: यहाँ उपर दिया कंपनी का नाम अपने आप आ जाता है | हम अपनी जरूरत के हिसाब से इसे बदल करे सकते है |
➲ Address: कंपनी का पता यहाँ टाइप करे|
➲ Statutory Compliance: देशों की सूची से भारत को सिलेक्ट करे|
➲ State: राज्यों की सूची से उिचत राज्यों को सिलेक्ट करे|
➲ Pin Code: निष्पादित पते का पिन कोड दर्ज करे|
➲ Telephone No.: कंपनी का टैलीफोन नबर दर्ज करे|
➲ E- Mail: यहाँ दिया गया ई-मेल पर टैली डॉक्यूमेंट, रिपोर्ट और डाटा को भजता है |
➲ Currency Symbol: यहाँ डिफ़ॉल्ट रूप से Rs होता है |
➲ Maintain: कंपनी का नचर सिलेक्ट करे यान सिफ अकाउंट या invantari के साथ अकाऊंट|
➲ Financial Year From: कंपनी का वित्तीय वष जो तारीख से शुरू होती है वह दर्ज करे|
➲ Books Beginning From: उपर दि गयी तारीख यहाँ अपने आप आ जाती है | लेकिन हम
कंपनी के अकाऊंट बुक जो तारीख से शुरू हो रहा है वह तारीख दे सकते है | उदा. के लिए अगर कंपनी 10 जन को शुरू हुई है तो यहाँ 10 जून तारीख दे|
➲ TallyVault Password: TallyVault यह एक सुधारीत सिक्यूरिटी फीचर है, जो कंपनी के डटा की सुरक्षा के लिए एनक्रिप्टेड फॉम में होता है और यह पासवड प्रोटेक्ट होता है | इस पासवर्ड के बिना डाटा को एक्सेस नही किया जा सकता| अगर यह पासवर्ड भूल गया है तो इसे रिकवर नही किया जा सकता|
➲ Use Security Control: टैली में कई सिक्यूरिटी कंट्रोल है, जो विभिन्न यूजर कि अथॉरिटी को डीफाइन करता है | इसमें डेटा को एक्सेस करना, डेटा भरना, बदल करना या डीलीट करना आदि कि अथॉरिटी दे सकते है |
➲ Base Currency Information:इसमें करंसी से सबंधीत विभिन्न जानकारी होती है जैसे करंसी सिंबल, करंसी का नाम, डिसिमल 

ऊपर दी गयी सभी जानकारी दर्ज करने के बाद नीचे के Y बटन को प्रेस करे| अब Geteway of Tally की स्क्रीन इस तरह से दिखगी -


Modification of Company information: कंपनी बनान के बाद, आप कंपनी के विवरण में बदलाव करे सकते है | इस के लिए Alt + F3 कि प्रेस करे और जो कंपनी को मोडीफाई करना है वह सिलेक्ट करे|
Shut Company: यदि आपने कोई कंपनी को ओपन किया है और अब आप इस बंद करना चाहते है तो Alt + F3 प्रेस करे और कंपनी को सिलेक्ट करे| इस कंपनी का नाम लिस्ट से निकाल दिया जाएगा|
Delete Company: अगर आपको तयार कोई कंपनी को डीलीट करना है तो पहले उसक सभी एंट्रीज को डीलीट करना होगा, फिर Alt+D कि प्रेस करे|

इसके अलावा वर्टिकल बटन बार पर निम्न बटन होते है -
1) F1: Select Company – अगर आपको एक से अधिक कंपनी ओपन करनी है तो F1 कि प्रेस करे|
2) F1: Shut Company – अगर एक से कंपनी ओपन है और कोई कंपनी बंद करनी है तो Alt+F1 कि प्रेस करे|
3) F2: Date – यहाँ से आप टैली की आज की तारीख बदल सकते है |
4) F2: Period - कंपनी का करट पिरियड सेट करने के लिए Alt+F2 कि प्रेस करे|
5) F3: Company – यह विकल्प तभी एक्टिवेट होता है जब एक से अधिक कंपनी ओपन हो| किसी कंपनी को सिलेक्ट करने के लिए F3 कि दबाएँ।
6) Alt + F3: Company Info - आप Alt + F3 कि प्रेस करग तो company info मेनू ओपन हेागा|

Tuesday, April 14, 2020

what is Tally ERP. 9

TALLY ERP HINDI


Lesson - 1


1. Introduction to Accounting
2. Advantages of Accounting
3. Definition
4. Types of Accounts
5. Golden Rules of Accounts
6. Double Entry System of Book Keeping

Objective :-
1. एकाउंटिंग क्या है ?
2. एकाउंटिंग के महत्व क्या है ?
3. एकाउंटिंग की डेफिनेसन ?
4. एकाउंटिंग के रूल्स और प्रकार

Accounting :- एकाउंटिंग यह एक प्रोसेस है पहचान करने की, रिकॉर्डिंग, सारांश और आर्थिक जानकारी की रिपोर्टिंग की, जो निर्माताओं के लिए वित्तीय ब्यौरा देकर निर्णय लेन के लिए मददत करता है |
Advantages of Accounting :-
निमंलिखित एकाउंटिंग रखने से लाभ होता है -
1) एकाउंटिंग से हम किसी विशेष समय की अवधि में लाभ या हानि हुई है यह समझ सकते है।
2) हम कारोबार के निम्न वित्तीय स्थिति को समझ सकते है
अ) व्यवसाय में है कितनी सम्पति है|
ब) बिजनेस पर कितना ऋण है|
ग) बिजनेस में कितनी किपटल है|
3) इसके अलावा, हम एकाउंटिंग रखने से बिजनेस के लाभ या हानि के कारण को समझ सकते है |
ऊपर दिए गय फायदो से हमें आसानी से यह समझ में आता है की एकाउंटिंग बिजनेस की आम है|

Defination :-
एकाउंटिंग सीखते समय हम नियिमत रूप से कुछ शब्दों का प्रयोग करना पडता है। तो पहले हम इन शब्दों के अथ समझत है -
1) Goods :- माल को बिजनेस में नियिमत और मुख्य रूप से खरीदा और बचा जाता है | उदाहरण के लिए - एक किराना दकान में साबुन, तेल आदि गुडस है | मुनाफ की खरीद और माल की बिक्री पर निर्भर करता है।

2) Assets :- एस्सेट्स कीमती चीज होती है, जो बिजनेस के लिए आवश्यक होती है और बिजनेस की सम्पति होती है| उदाहरण के लिए- बिल्डिंग, वेइकल, मशीनरी, फर्नीचर

3) Liabilities :- लाइअिबलटीज़ दुसरो द्वारा बिजनेस को दि जाती है है। उदाहरण के लिए – बैंक से लिया गया लोन, क्रेडिट पर माल की खरीद।

4) Capital :- किपटल यान पूंजी जो बिजनेस के मालिक द्वारा किया गया निवश होता है| यह किपटल कैश, गुडस या एस्सेट्स के रूप में होता है। जब की यह किपटल बिजनेस के मालिक द्वारा इन्वेस्ट किया गया है, तो बिजनेस के अनसार यह किपटल भी एक लाइअिबलटीज़ होती है |

5) Debtor:- जिससे बिजनेस को निश्चित राशि लेनी होती है उस ड᭣टर कहा जाता है |

6) Creditor :- जिन्हें हमार बिजनेस को निश्चित राशि देनी होती है ह उन्हें क्रेडिटर कहा जाता है।

7) Business Transaction :- एक वित्तीय घटना है जो बिजनेस से सबंधित है और जिसका प्रभाव कंपनी की वित्तीय स्थिति पर पडता है | उदाहरण के लिए – माल की खरीद, वेतन, क्रेडिट पर माल को बचना।

8) Cash Transaction :- जो ट्रांजेक्शन नकदी में किए जात है उन्हें कैश ट्रांजेक्शन कहा जाता है|

9) Credit Transaction :- जो ट्रांजेक्शन क्रेडिट पर किए जात है उन्हें क्रेडिट ट्रांजेक्शन कहा जाता है।

10) Account:- अकाउंट किसी ट्रांजेक्शन का स्टेटमेंट होता है, जो किसी एस्सेट्स , लाइअिबलटीज़, आमदनी या खर्च को प्रभावित करता है |

11) Ledger :-लेजर एक बुक होता है जिसम पर्सनल, रियल या नॉमिनल के सभी अकाउंट होता है जिनकी एंट्री ,जेर्नल या सहायक पुस्तिका में होती है |
Types of Accounts:
1) Personal Accounts:- सभी व्यक्ति, सोसायटी, ट्रस्ट, बैंक और कपिनयों के खात पर्सनल अकाउंट है | उदाहरण के लिए - Rahul A/c, Gayatri Sales A/c, Subodh Traders A/c, Bank of Maharashtra A/c.
2) Real Accounts:- रियल अकाउंट में सभी एसेट्स और गुडस अकाउंट शामिल है। जैसे- Cash A/c, Furniture a/c, Building A/c.
3) Nominal Accounts:- बिजनेस से संबंधित सभी आय और खर्च नॉमिनल अकाउंट के अंतगत आत है। उदा - Salary A/c, Rent A/c, Commission A/c, Advertisement A/c, Light Bill A/c.
Golden Rules of Accounts:
ट्रांजेक्शन करते समय, हम डेबिट या क्रेडिट साइड का फसला करना होता है। इसके निम्नलिखित नियम है –
1) Personal Accounts:-
Debit : The Receiver or Debtor
Credit : The Giver or Creditor
2) Real Accounts:
Debit : What comes in
Credit : What goes out
3) Nominal Accounts:
Debit : All Expenses & Losses
Credit : All Incomes & Gains
Double Entry System of Book Keeping
प्रत्येक ट्रांजेक्शन व्यापार पर दो तरीक से प्रभावित करता है| उदाहरण के लिए,
a) गुडस कैश में खरीदा – इस ट्रांजेक्शन में गुडस बिजनेस में आ रहा है लकिन उसी समय बिजनेस से कैश बाहर जा रही है |
b) गुडस क्रेडिट पर दत्ता ट्रेडर्स को बचा – इस ट्रांजेक्शन में गु᭙स बिजनेस से बाहर जा रहा है आिण उसी समय दत्ता ट्रेडर्स हमार कारोबार का देनदार हो जाता है |
डबल एंट्री सिस्टम के अनसार – ऐस सभी बिजनेस ट्रांजेक्शन को अकाउंट में रिकॉर्ड करते समय इसके दो पहलू होता है Debit aspect (receiving) और Credit aspect (giving).

सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) में कैसे शुरू कर सकते हैं निवेश?

सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) में कैसे शुरू कर सकते हैं निवेश? कन्या समृद्धि योजना (SSY) बेटियों के लिए छोटी बचत योजना है. SSY को केंद्र सरकार...